हृदय पुष्प

हृदय पुष्प

कभी कभी तो देख किसी को हृदय पुष्प खिल उठता,
अनजाना अपना बनता फिर जान से प्यारा लगता॥
कभी किसी की एक झलक ही कई जख्म दे जाती,
बन जाती नासूर और फिर रह-रह कर तड़पाती॥
सबके जीवन में होती हैं प्यार और तकरार,
मेरी कविताओं में भी हैं पतझड़ और बहार॥