अमलताश गुलमोहर


फूल पात कुम्हला गए पारा हुआ पचास।
पीली छटा बिखेरता आया अमलतास॥

फूलों के गुच्छे दिखें नहीं एक भी पात।
पीले रंग में रँग गया अमलतास का गात॥

लाल हुई गुलमोहर भी आई सुर्ख बहार।
पत्ते कहीं-कहीं दिखें फूलों की भरमार॥

लाल-सिंदूरी हो गया कली-कली का रंग।
पाँच पंखुरी बीच में जिनके है मकरंद॥

सूरज डाल नहीं सका इन पर कोई प्रभाव।
ज्यों-ज्यों उगले आग वो त्यों-त्यों आए शबाब॥

विषम परिस्थिति देखकर होना नहीं उदास।
पतझड़ है तो समझ लो आई मंजिल पास॥

31 comments:

Sonal Rastogi said...

वही गर्मी जिसमे अच्छे अच्छे फूल कुम्हला जाते है वही अमलतास पर बहार ले आती है ...सुन्दर दोहे

Apanatva said...

ati sunder.

Jyoti Mishra said...

very beautiful sir !!

anupama's sukrity ! said...

bahut sunder dohe ...!!

रचना दीक्षित said...

वाह !!!!!!!!!राकेश जी प्रकृति का इतना सुन्दर वर्णन इस गर्नी में भी रंगों की ठंडक दे गया. बेमिसाल दोहे

kshama said...

Wah! kya rang bikhere hain is rachana ke dwara!

ehsas said...

बहुत खुब। शानदार।

Sunil Kumar said...

कौन कहता की गर्मी है रचना तो ठंडक दे रही है आभार

मनोज कुमार said...

कमाल की रचना। बहुत सुंदर प्रकृति वर्णन।

Vaanbhatt said...

खड़ी हिंदी में दोहे...पहली बार पढ़े...बहुत ही अच्छे लगे...

Vivek Jain said...

शानदार।
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

कविता रावत said...

पीले गुच्छे पुष्प के नहीं एक भी पात।
पीले रंग में रंग गया अमलतास का गात।।
...jab road par garmi se bura haal hota hai, aise phoolon ke dekh raahat milti hain ki ye bhi to kis tarah haskar khil rahen hai..phir garmi ka prabhav kam lagne lagta hai...
सूरज डाल नहीं सका इन पर कोई प्रभाव।
ज्यों-ज्यों उगले आग वो त्यों-त्यों आए सबाव ।।
.....prakriti se bahut kuch seekh milti hai, bas usse taartamya banaye rakhne kee jarurat hoti hai.....
bahut achhi prastuti..

Babli said...

टिप्पणी देकर प्रोत्साहित करने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया!
विषम परिस्थिति देखकर होना नहीं उदास।
मंजिल खुद मिल जाएगी गर होगा विश्वास।।
बहुत ही सुन्दर और शानदार दोहे! प्रशंग्सनीय प्रस्तुती!

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

लाल-सिंदूरी हो गया कली-फूल का रंग।
पाँच पंखुरी बीच में जिनके है मकरंद।।

Bahut sunder dohe...

चन्द्रकांत दीक्षित said...

देख लेखनी आपकी हृदय हुआ प्रसन्न
सर्दी दस्तक दे गई गर्मी रह गई सन्न

सोचा दोहों पर टिप्पणी क्यूँ न दोहे से की जाये. गुस्ताखी माफ कीजियेगा.

Maheshwari Kaneri said...

लाल-सिंदूरी हो गया कली-फूल का रंग।
पाँच पंखुरी बीच में जिनके है मकरंद।।....कमाल की रचना। बहुत सुंदर प्रकृति वर्णन।

mahendra verma said...

वाह, राकेश जी, वाह।
बढ़िया दोहे, सुंदर।

रेखा said...

उत्साह वर्धक रचना से उत्साह बढ़ाने के लिए धन्यवाद

Babli said...

मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com/

http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

Richa P Madhwani said...

विषम परिस्थिति देखकर होना नहीं उदास।
पतझड़ है तो समझ लो आई मंजिल पास

bahut achi likhi..
blog par comment karne k liye apka dhanyavad

Rachana said...

लाल-सिंदूरी हो गया कली-कली का रंग।
पाँच पंखुरी बीच में जिनके है मकरंद।।
aankhon ke samne chitr sa umad gaya
bahut sunder
rachana

JHAROKHA said...

aadarniy sit ji
bahut hi dino baad aapka mere blog par aana hua sach! bahut bahut hi achha laga .
par main ye aapse shikayat nahi kar rahi hun ,plz, anytha na lijiyega .
sach to yah ki gat december se aswasthta ke karan udhar jyada der net par nahi aa pati thi
jab dheere dheere aana shuru kiya to ye laga ki pahle jitne comments aaye hain unka jawab to de dun ,par abhi tak sabhi ke blog tak pahunchna nahi ho paa raha hai.
kyon ki abhi bhi puri tarah se swath nahi hui hun .
post to kisi se bhi dalwa deti hun jo pahle ki likhi rahti hun ,par comments dena mujhe hi achha lagta hai.
bas---vitaar se kya likhun
apna hal vilamb ka karan likh diya.bahut hi sharminda bhi hujo aap jaise mahan vibhutiyo ke blogo tak nahi pahunch pa rahi hun ,dil se xhma chati hun.
---------aapki rachna hamesha ki hi tarah ek naveenta liye hue tatha ooj se bhari hoti hai .har panktiyan koi na koi sades jarur deti hai .par aakhri ki do panktiyan mujhe bahut bahut hi achhi lagin---------

विषम परिस्थिति देखकर होना नहीं उदास।
पतझड़ है तो समझ लो आई मंजिल पास।।
bahut hi behtreen prastuti ke liye
aapko hardik badhai
v-naman
punah xhma ke saath
poonam

Suresh Mishra said...

bahut achhe

Reetika said...

Khoobsoorat jeevan darshan...

Ashutosh Dubey said...

बहुत सुन्दर !
हिंदीकुंज

Madhulika Patel said...

बहुत सुन्दर ।

जमशेद आज़मी said...

सुंदर रचना। यह रचना तो बहुत पहले प्रकाशित हुई थी। भााई, नई रचनाएं भी अपडेट कीजिए। यदि एडसेंस को लंबें वक्‍त तक अपने पास रखना है। एडसेंस तो आसानी से मिल रहा है। पर हिंदी ब्‍लागर्स उसे सहेज कर रख नहीं पा रहे हैं।

Ankur Jain said...

सुंदर प्रस्तुति।

Jyoti Dehliwal said...

बहुत बढिया!

पूनम श्रीवास्तव said...

bahut bahut badhai sir
bahut hi lajwaab prastuti

Dr.pratibha sowaty said...

शानदार रचना