जामुन

वर्षा आई बढ़ गई उमस हुए बेहाल
काले फल से लद गई जामुन की हर डाल।।

कल तक थे कच्चे हरे और कषैला स्वाद।
बूदें पाकर हो गए मीठे काले स्याह॥

मुरझाई सी पत्तियां लगती थी बेरंग।
हरियल होकर झूमती आज हवा के संग॥

काली जामुन देखकर बेशक टपके लार।
चढ़ना मत इस पेड़ पर बहुत करकरी डार॥

बेर न रहा गरीब का जामुन छूटा जाइ।
बीस रूपइये पाव हैं कैसे कोई खाइ॥

69 comments:

Sonal Rastogi said...

waah.. muh mein paani aa gaya

मनोज कुमार said...

जामुन पर इतनी अच्छी रचना मैंने नहीं पढ़ी है।

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

अब मेरे घर के पास तो पेड भी नहीं है,

कविता रावत said...

काली जामुन देखकर बेशक टपके लार।
चढ़ना मत इस पेड़ पर बहुत करकरी डार।।

बेर न रहा गरीब का जामुन छूटा जाइ।
बीस रूपइये पाव हैं कैसे कोई खाइ।।

... baaton -baaton mein aapne bahut sochniya baat kah dee..mere maayike mein bhi jamun ka pen hai aajak roj mil jaata hai ..baajar se khareedne ke himmat hi nahi hoti....

निवेदिता said...

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निवेदिता said...

मुझे तो बारिश जिजिवषा का प्रतीक सी लगी .....अच्छा लगा पढ़ना ...... आभार !

Vaanbhatt said...

कौशिक जी...प्रकृति का हर रूप निराला है...और उसको निरखने वाले की दृष्टि पर रश्क होता है...ठेले पर रक्खी...और पेंड पर लगी जामुन के स्वरुप में कितना फर्क है...वाकई लार टपक गई...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत बढ़िया दोहे!
सभी बहुत खूबसूरत हैं!

kshama said...

Jamun pe bhee koyi rachana rach sakta hai...socha na tha! Sundar!

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

बहुत सुन्दर रचना!

रचना दीक्षित said...

वाह राकेश जी जामुन की तस्वीर देखकर मुंह में पानी आ रहा है. जामुन के गुण दोष भी बता दिए आपने और महगाई पर भी करारा कटाक्ष जड़ दिया.

बेर न रहा गरीब का जामुन छूटा जाइ।
बीस रूपइये पाव हैं कैसे कोई खाइ।।

बहुत सुंदर.

Udan Tashtari said...

बढ़िया दोहे...

Sunil Kumar said...

बीस रूपइये पाव हैं कैसे कोई खाइ।।
यही समस्या है :)

dipak kumar said...

baarish to record tod chuki hai chhotawriters.blogspot.com hamare blog se bhi update rahe

Parul said...

kamaal ke dohe hai :)

नीरज गोस्वामी said...

जामुन पर लिखी इस अप्रतिम रचना के लिए बधाई स्वीकारें....

नीरज

JHAROKHA said...

aadarniy sir
sach ko darshati hui aapki rachna waqai me behatreen lagi .
badi khoobsurati ke saath aapne aaj ke samay me badhti hui mahngai ki maar ko bhi parilakxhit kar diya hai
bahut bahut badhai
sadar naman
poonam

anitakumar said...

सच है बीस रुपये पाव हैं कैसे कोई खाये

ehsas said...

शानदार रचना। आभार।

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

सुंदर ...बहुत सुंदर दोहे

Babli said...

जामुन देखकर तो मुँह में पानी आ गया! कई साल हो गए मैंने जामुन नहीं खाए क्यूंकि ऑस्ट्रेलिया में नहीं मिलता है! आप कौरिएर कर दीजिये! जामुन जैसी मीठी और सुन्दर रचना!

mahendra srivastava said...

क्या बात है। बहुत सुंदर

रेखा said...

कुछ दिनों पहले हम महाबलेश्वर घूमने गए थे . वहां हमने तीस रूपये पाव लिया था. आपकी जामुन की रचना पढ़कर यादें फिर से ताज़ा हो गई.

श्रीप्रकाश डिमरी /Sriprakash Dimri said...

बहुत ही सुन्दर ललचाती एवं मन को स्पर्श करती रचना ..कितन बदल गया समय ..वो भी दिन थे जब पेड़ पर चदकर जामुन खाते थे ..कोई रोक टोक नहीं अब कहाँ गए वो पेड़ ..कंक्रीट के जंगल में खो गए ....दाम तो बढेंगे ही ....आपको साधुवाद ...

Rahul said...

bahut sundar rachna , sasti jamun khane ke liye mujhe HYD se bihar jana pada..good poem...a change from usual poems we keep writing.

नश्तरे एहसास ......... said...

Sir aapne bahut khoob kaha hai,
बीस रुपये पाव हैं कैसे कोई खाये

Apanatva said...

badee acchee lagee aapkee rachana.

shashisinghal said...

सच्ची - मुच्ची कौशिक जी ये बीस रुपैया पाव जामुन कैसे खाई और कैसे खिलाई , उस पर खट्टी निकल जाई तो का करिबे .......

शाहजाहां खान “लुत्फ़ी कैमूरी” said...

kaise koi khai.............
ha bhaya kaise koi khai....

Babli said...

मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com/
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

गगन शर्मा, कुछ अलग सा said...

राकेश जी, मंहगाई जो ना छुड़वा दे !!!

mahendra verma said...

काली जामुन देखकर बेशक टपके लार।
चढ़ना मत इस पेड़ पर बहुत करकरी डार।।

बहुत बढ़िया। सचमुच जामुन खाने की इच्छा होने लगी।

Vivek Jain said...

बहुत सुंदर,
आभार,
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

Sapna Nigam ( mitanigoth.blogspot.com ) said...

जामुनी दोहे पढ़ कर मायके के जामुन का वृक्ष याद आ गया.बचपन में खूब जामुन खाते थे.सुंदर कविता.अंतिम दोहे के लोक पुट ने मीठास बढ़ा दी.

Dr (Miss) Sharad Singh said...

जामुन पर लाजवाब दोहे....

S.N SHUKLA said...

सामायिक और बहुत सुन्दर प्रस्तुति

शिखा कौशिक said...

काली जामुन देखकर बेशक टपके लार।
चढ़ना मत इस पेड़ पर बहुत करकरी डार।
- बहुत सुन्दर प्रस्तुति.आभार,

Richa said...

nice post..
मुरझाई सी पत्तियां लगती थी बेरंग।
हरियल होकर झूमती आज हवा के संग।।

Sawai SIingh Rajpurohit said...

बहुत सुन्दर रचना शेयर करने के लिये बहुत बहुत आभार,

Jyoti Mishra said...

awesome writing on jaamun !!!
Love to have them in this beautiful rainy season.

Rachana said...

काली जामुन देखकर बेशक टपके लार।
चढ़ना मत इस पेड़ पर बहुत करकरी डार।।
sahi kaha bujhe bachpn ki baat yad aagai
mujhe prd pr chadhna bahut achchha lagta tha .pr ma hamesha jamun ke ped pr jane ko mana karti thi .
bahut sunder likha hai aapne
saader
rachana

सतीश सक्सेना said...

सही चिंतन !
हार्दिक शुभकामनायें !

संध्या शर्मा said...

बहुत सुन्दर रचना........

Khare A said...

RATE TO AAPNE EK DAM SAHI BATAYE! KAL JAB SHAM KO DUTY SE GHAR PAHUNCHA TO BITIYA NE JAMUN KI THAILY MERE SAAMEN RAKHI, KI PAPA YE AAPKE HISSE KI, KOI 7-8 JAMUN RAHI HONGI, MENE KAHA KI ITNI KYUN, BOLI 20 KI PAV LI THI MUMMY NE, MAIN ASHCHARYE ME PADH GAYA, AUR BAHCPAN YAD HO AAYA, JAB HUM PED PAR CHADKAR JAMUN TODTE THE, MUFT KI!

NICE POEM

Deepa Kandpal said...

आपको मेरा नमस्कार...
बहुत बहुत सुन्दर रचना..:))

smshindi By Sonu said...

बहुत बहुत सुन्दर रचना

smshindi By Sonu said...

प्रिय ब्लोग्गर मित्रो
प्रणाम,
अब आपके लिये एक मोका है आप भेजिए अपनी कोई भी रचना जो जन्मदिन या दोस्ती पर लिखी गई हो! रचना आपकी स्वरचित होना अनिवार्य है! आपकी रचना मुझे 20 जुलाई तक मिल जानी चाहिए! इसके बाद आयी हुई रचना स्वीकार नहीं की जायेगी! आप अपनी रचना हमें "यूनिकोड" फांट में ही भेंजें! आप एक से अधिक रचना भी भेजें सकते हो! रचना के साथ आप चाहें तो अपनी फोटो, वेब लिंक(ब्लॉग लिंक), ई-मेल व नाम भी अपनी पोस्ट में लिख सकते है! प्रथम स्थान पर आने वाले रचनाकर को एक प्रमाण पत्र दिया जायेगा! रचना का चयन "स्मस हिन्दी ब्लॉग" द्वारा किया जायेगा! जो सभी को मान्य होगा!

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हेल्लो दोस्तों आगामी..

Kailash C Sharma said...

बहुत सुन्दर और रोचक प्रस्तुति..

मो. कमरूद्दीन शेख said...

जामुन के माध्यम से आज की मंहगाई की चेतावनी अच्छी लगी।

मान जाऊंगा..... ज़िद न करो said...

jammun par likhe gaye in dohon ke liye dil se kotishah dhanyawaad...

aakarshan

अरुण चन्द्र रॉय said...

देर से पंहुचा कौशिक जी लेकिन जामुन ताज़ा और स्वादिष्ट थे आपकी कविता की तरह ही..... बहुत सुन्दर...

prritiy---------sneh said...

कल तक थे कच्चे हरे और कषैला स्वाद।
बूदें पाकर हो गए मीठे काले स्याह।।

waah muh mein jamun ka swad aa gaya, sunder kriti.

shubhkamnayen

Suman said...

bahut sunder panktiyaan........

Navin C. Chaturvedi said...

जामुन बेर चखा दिये, खट्टे-मीठे साब|
इन की संगत पा, हुई, ये प्रस्तुति नायाब||

अभी पिछले पहिने लोनावाला गए थे| वहाँ एक पेड़ से जामुन भी तोड़ तोड़ कर खाये थे हम लोगों ने| जामुन तोड़ कर खाने का मज़ा लूट कर बच्चे भी खुश हो गए|

इस सुंदर प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत बधाई राकेश जी|

Priyanka Agrawalla said...

जामुन के बारे में पहली बार एक कविता पढने को मिली! बहुत सुन्दर वर्णन किया है आपने! और आपके जामुन का प्यार भी जानने को मिली हमें :)


मेरे ब्लॉग में कमेन्ट देने लिए बहूत बहूत धन्यवाद! उम्मीद है आप हमारे पोस्ट्स को पढ़ कर कमेन्ट करते रहेंगे.

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

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Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

amun aap ko bhaya , aap jamun ko bhaye honge...kabhi charcha mein nahi tha jo jamun usne bhi jashan manaye honge

vibha rani Shrivastava said...

मेरा मनपसंद फल .....
जीभ काले-काले दिखलाने में
खुशी मिलती थी जब छोटी थी
आज से 22 साल पहले
बिहार में आठ आने पाव था ....
तो मुंबई में 10 रुपए पाव था
लोग खाते ही थे
हार्दिक शुभकामनायें ....

Reena Maurya said...

क्या कहने ..बहुत ही बेहतरीन रचना..
लाजवाब...
:-)

दिगम्बर नासवा said...

वाह कितने जामुनी दोहे हैं ... लाजवाब दिल को छूते हुए ... मुंह में पानी लाते हुए ...

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

बहुत उम्दा...बहुत बहुत बधाई...

डॉ. जेन्नी शबनम said...

बेर छूटा गरीब का अब बारी जामुन की आई, हाय रे महँगाई... बहुत अच्छी रचना, बधाई.

बेनामी said...

बहुत सुन्दर रचना!

Darshan Jangara said...

बहुत खूबसूरत

Darshan Jangara said...

आज पहली बार आप के ब्लॉग पर आया हु बहुत अच्छा लगा .

Rajput said...

जामुन के नाम से ही मुह मे पानी आ जाता है, मगर बढ़ती महंगाई ने लोगों के मुह सील दिये हैं।
बहुत खूबसूरत

हिमाँशु अग्रवाल said...

बहुत सही कहा आपने। बेर वाकई में २० रुपये पाव हैं । कोई कैसे खाए । सुन्दर और सरल रचना।


Digamber Naswa said...

काले जनून का असर फिर से दिखाई दे रहा है ... मस्त रचना दुबारा पढवाने का आभार ...

Dr.NISHA MAHARANA said...

bahut sundar rachna ..manbhawn jamun .....