बेताव



बिकने को हैं बेताव हम  
कीमत लगाइए।
ईमान, इज्जत, शर्म की
खिल्ली उड़ाइए।।
दौलत के आगे अब हमें 
कुछ भी नहीं भाता।
पैसे दिखाकर जैसे भी 
चाहो नचाइये ।।