बेशर्म

सरहद पार करी छुप के कोहरे का लाभ उठाया है।
घात लगाकर दो फौजी वीरों को मार गिराया है।।
क्षत-विक्षित कर दिए जिस्म निर्दयी, क्रूर, हैवान बना।
शीश काटकर हेमराज का तेरे घर में जश्न मना।।
युद्ध-विराम का उल्लंघन कर अनुबंधों को तोड़ा है
बात सुलह की करते-करते तोपों का मुंह खोला है।।
साक्ष्य रख दिए सम्मुख तू आतंकवाद को पाल रहा।
उल्टा दोष हमें देकर उसपर पर भी पर्दा डाल रहा।।
जियो और जीने दो वाले पथ के हम अनुगामी हैं।
लेकिन छल करने की तेरी आदत वही पुरानी है।।
जब-जब तूने आँख तरेरीं तब-तब मुँह की खाई है।
फिर भी ओ-बेशर्म ठिकाने तेरी अक्ल नहीं आई है।।
पानी सर से उतर गया अब मांफी तुझे नहीं होगी।
इन न्रशंस हत्याओं की भरपूर सजा तुझको होगी।।
वीर "सुधाकर", "हेमराज" का हमसब कर्ज चुकायेंगे।
वापस दे दे शीश नहीं तो फिर से सबक सिखायेंगे।।



 माँ भारती के अमर सपूतों शहीद
लांस नायक हेमराज और सुधाकर सिंह को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि
हेमराज और वीर सुधाकर को कोई भुला न पायेगा।
भारत माँ का कण-कण इन वीरों की गाथा गायेगा।।