2013



दो हजार बारह गया "तेरह" का  आगाज।
मनोकामना पूर्ण हों बनें सभी के काज।।

बनें सभी के काज द्वेष ना उपजे
उर में।
बढ़े प्रेम-सौहार्द ख़ुशी महके घर-घर में।।

जनहित की
हो सोच बदल जाए परिपाटी।
शासक समझें दर्द न भाँजे जन पर लाठी।।