सुची प्रेम

सुची और प्रेम

राधा गोरी ना रहीं नहीं सलोने श्याम।
एक-दूजे के रंग रंगे राधा और घनश्याम।।
राधा और घनश्याम प्यार परिणिती तक आया।
द्वापर में ना सही आज गठबंधन पाया।।
सुची-प्रेम हम कहें मुबारक तुमको शादी।
श्याम-राधिका जैसी जोड़ी लगे तुम्हारी।।

बनी रहे जोड़ी सदा बढ़े दिनोंदिन प्यार।
काँटे मिट जाइ राह के फले फूले परिवार।।
फले फूले परिवार और सुख संपति बरसे।
दामपत्य जीवन दोनों का पल पल हरसे।।
ख़ुशी हो या आनंद सुनें उसकी किलकारी।
दो से हो जाऐं तीन यही कामना हमारी।।