भौतिकवाद

सुरसा
भौतिकवाद आज की सुरसा
बढ़ता जाए रोज बदन।

इंसानियत डकार गई और
लोक-लाज का किया हनन।

परंपरा संस्कार सभ्यता
का दिन रोज करे भक्षण।

राम नही ना बजरंगी अब
बचना है तो करो जतन।।