समय

समय समय का फेर है समय समय की बात।
किसी समय का दिन बड़ा किसी समय की रात॥

समय समय का फेर है समय बड़ा बलवान।
भील ले गए गोपिका वही अर्जुन वही बाण॥

समय समय की बात है समय समय का खेल।
कभी कबूतर डाकिया आज बना ईमेल॥

समय समय की बात है समय समय का सार।
कविता थी कविता कभी आज चुटकुले चार॥

समय समय की बात है समय समय का राग।
कभी दिलों में प्यार था अब नफरत की आग॥

समय समय का फेर है समय समय का ढंग।
दुश्मन लड़ते थे कभी अपनों में अब जंग॥

4 comments:

राकेश कौशिक said...

Prashant Jha

lamho ko aaise sazaate chal, rahe pal ki nihaare tujhe harpal

राकेश कौशिक said...

Pammi Singh

समय समय की बात है समय समय का राग... बहुत बढिया...समय के महत्व को प्रस्तुत करती रचना।

राकेश कौशिक said...

जयबीर सिंह

बहुत खूब

राकेश कौशिक said...

प्रतिमा

प्रशंसनीय